Sunday, April 13, 2014

भरोसे की चादर में लपेट कर ,
कुछ राज़ भेज रहा हूँ मैं, 
सहेज कर रखना !
अपनी सारी विरासत भेज रहा हूँ मैं। 

Saturday, April 12, 2014

क्या कीजिये

खिड़की दरवाजों से झांकती इन यादों का क्या कीजिये,
छेड़ दीजिये थोड़ा, या यूँ ही छोड़ दीजिये ?

लड़ती-झगड़ती, मनुहार-दुलार करती इन यादों का क्या कीजिये,
चपत धीरे से लगा दीजिये, या लाड़ थोड़ा और दिखा लीजिये ?

आँखों से झरती, होंठो से खिरती इन यादों का क्या कीजिये,
रोक लीजिये, या बहने दीजिये ?

कुछ तितलियों सी रंगीन हैं मेरी यादें, कुछ पानी सी बेरंग भी, क्या कीजिये,
 किताबो में छुपा लीजिये या हवाओं मे उड़ा इन्हे दीजिये !!!